BJP को शिंदे के अगले कदम का इंतजार, जो कर सकता है 'ठाकरे युग' का अंत

News18 | 1 day ago | 23-06-2022 | 04:05 pm

BJP को शिंदे के अगले कदम का इंतजार, जो कर सकता है 'ठाकरे युग' का अंत

प्रग्या कौशिक/मुंबई: महाराष्ट्र का मुख्यमंत्री कार्यालय एक और बदलाव देख सकता है, जो नवंबर 2019 के बाद से तीसरा होगा. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सूत्रों ने गुरुवार को कहा कि वह सरकार बनाने का दावा पेश करने के लिए तैयार है. एक बार एकनाथ शिंदे यह घोषणा कर दें कि उद्धव ठाकरे के खिलाफ विद्रोह में उनके साथ कितने विधायक शामिल हैं. सूत्रों ने कहा कि एकनाथ शिंदे, जो 40 से अधिक विधायकों के समर्थन का दावा करते हुए गुवाहाटी के एक लग्जरी होटल में डेरा डाले हुए हैं, शिवसेना के नाम और चुनाव चिन्ह पर दावा करने के लिए कागजी कार्रवाई की तैयारी कर रहे हैं.उद्धव ठाकरे पहले ही महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री का आधिकारिक आवास ‘वर्षा बंगला’ खाली कर चुके हैं और अपने परिवार के साथ पुश्तैनी घर ‘मातोश्री’ में चले गए हैं. उद्धव द्वारा विद्रोही खेमे से भावनात्मक अपील और सीएम पद छोड़ने की पेशकश के बावजूद, एकनाथ शिंदे इस बात पर अड़े हुए हैं कि शिवसेना महाराष्ट्र में कांग्रेस और राकांपा के साथ अपना गठबंधन समाप्त कर ले. भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि पार्टी एकनाथ शिंदे द्वारा उनके साथ मौजूद विधायकों के समर्थन की घोषणा का इंतजार कर रही है और शुक्रवार को औपचारिक रूप से उद्धव ठाकरे की सरकार को सत्ता से बेदखल करने के लिए चुनौती दे सकती है.उद्धव ठाकरे के पास केवल 15 शिवसेना विधायकों का समर्थन बचा हैमहाराष्ट्र में ताजा राजनीतिक संकट पर पार्टी की चर्चा और रणनीति की जानकारी रखने वाले एक भाजपा नेता ने कहा कि राज्य में नई सरकार अगले सप्ताह शपथ ले सकती है. भाजपा के सूत्रों का दावा है कि 288 सदस्यीय विधानसभा में उद्धव के पास केवल 15 विधायकों का समर्थन बचा है, और उनमें से भी कुछ जल्द ही अपना बागी खेमा जॉइन कर सकते हैं. कागज पर, शिवसेना, जो महाराष्ट्र विकास अघाड़ी गठबंधन का नेतृत्व करती है, के पास 55 विधायक हैं, उसके बाद सहयोगी राकांपा के पास 53 और कांग्रेस के पास 44 विधायक हैं. लेकिन शिंदे के 40 से अधिक विधायकों के समर्थन का दावा करने के साथ, ठाकरे खेमे के लिए बहुमत साबित करना बहुत कठिन होगा.शिवसेना के नाम और चुनाव चिह्न पर दावा कर सकते हैं एकनाथ शिंदेयदि एकनाथ शिंदे खेमा आधिकारिक तौर पर शिवसेना के नाम और चुनाव चिह्न के इस्तेमाल के लिए आवेदन फाइल करता है, तो चुनाव आयोग पार्टी की शीर्ष समितियों और निर्णय लेने वाली संस्थाओं और उसके विधायी विंग के भीतर विद्रोही गुट के समर्थन के आधार पर विवाद का फैसला करेगा. यदि किसी निर्णय पर पहुंचने के लिए संगठनात्मक समर्थन पर्याप्त रूप से स्पष्ट नहीं है, तो चुनाव निकाय इस आधार पर निर्णय ले सकता है कि शिवसेना के अधिकांश सांसद और विधायक किसके पक्ष में हैं. यह एक ऐसा परिदृश्य होगा, जिसमें एकनाथ शिंदे को लाभ हो सकता है. इस तरह ठाकरे न केवल विधानसभा में, बल्कि बृहन्मुंबई नगर निगम में भी सत्ता खो देंगे, जहां सितंबर-अक्टूबर में चुनाव होने हैं.उद्धव ठाकरे के लिए विधानसभा के साथ बीएमसी की सत्ता भी दांव परशिंदे द्वारा उठाए गए विद्रोह के झंडे से न केवल विधानसभा में बल्कि मुंबई नगर निकाय में भी ठाकरे को सत्ता गंवानी पड़ सकती है, जिस पर उनके नेतृत्व वाली शिवसेना ने 3 दशकों से अधिक समय तक यानी 1989 से ही शासन किया है. सूत्रों का मानना है कि विधायकों के बाद, शिवसेना के पार्षद शिंदे के प्रति निष्ठा की शपथ ले सकते हैं और पार्टी को बीएमसी में भी विभाजित कर सकते हैं. यह एक ऐसी संभावना है जो भाजपा को सितंबर-अक्टूबर में होने वाले चुनावों में मेयर पद पर एक मजबूत बढ़त देती है. ठाकरे परिवार के लिए पहले से ही संसद में अपनी जगह बनाना मुश्किल हो रहा है, जहां उसके 17 में से 12 सांसद शिंदे समर्थक बताए जाते हैं. बागी नेता का अगला कदम महाराष्ट्र की राजनीति में ठाकरे युग के अंत की शुरुआत का प्रतीक हो सकता है.ब्रेकिंग न्यूज़ हिंदी में सबसे पहले पढ़ें News18 हिंदी | आज की ताजा खबर, लाइव न्यूज अपडेट, पढ़ें सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट News18 हिंदी |Tags: CM Uddhav Thackeray, MVA Government, Shivsena

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