फ्लोर टेस्ट या फिर उद्धव का इस्तीफा! जानें किस स्थिति में गिर सकती है सरकार

News18 | 4 days ago | 24-06-2022 | 04:05 pm

फ्लोर टेस्ट या फिर उद्धव का इस्तीफा! जानें किस स्थिति में गिर सकती है सरकार

मुंबई. शिवसेना नेता व महाराष्ट्र सरकार में मंत्री एकनाथ शिंदे के बगावत के चलते प्रदेश की राजनीति में अस्थिरता पैदा हो गई है. इस वक्त 35 के करीब शिवसेना विधायक शिंदे गुट के साथ गुवाहाटी में मौजूद हैं. वहीं मुख्यमंत्री और पार्टी सुप्रीमो उद्धव ठाकरे ने कई बागी विधायकों की सदस्यता रद्द करने की मांग की है. एकनाथ शिंदे ने दावा किया है कि उनके पास निर्दलीय सहित 50 विधायकों का समर्थन है, जो उनके गुट को “असली शिवसेना” बनाता है. वहीं ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने बुधवार को विधायक दल की बैठक में शामिल नहीं होने के लिए शिंदे खेमे के 12 विधायकों को अयोग्य ठहराने की मांग की है. इस पर प्रतिक्रिया देते हुए एकनाथ शिंदे ने कहा कि संविधान की 10वीं अनुसूची के अनुसार पार्टी व्हिप विधायिका की कार्यवाही के लिए जारी किया जाता है न कि बैठक में भाग लेने के लिए.बता दें कि विधायकों की अयोग्यता सबसे अधिक संभावना महाराष्ट्र के राजनीतिक नाटक के दूसरे अध्याय का शुरुआती दृश्य हो सकती है. महाराष्ट्र में वर्तमान शिवसेना-एनसीपी-कांग्रेस सरकार तभी गिर सकती है जब उद्धव ठाकरे संख्या की कमी के कारण इस्तीफा देने का विकल्प चुनते हैं या यदि वह विधानसभा में फ्लोर टेस्ट हार जाते हैं. इसलिए हम आपको उन सभी संभावित घटनाओं के बारे में बताने जा रहे हैं, जो महाराष्ट्र की राजनीति में घट सकती है. मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने शिंदे खेमे से एक भावनात्मक अपील करते हुए पहले ही शीर्ष पद छोड़ने की पेशकश की है और बुधवार को पारिवारिक आवास ‘मातोश्री’ के लिए आधिकारिक निवास ‘वर्षा’ छोड़ दिया. शिंदे, हालांकि, जिद कर रहे थे कि वह एनसीपी और कांग्रेस के साथ गठबंधन तोड़ दें.इस्तीफा या फ्लोर टेस्टबता दें कि एकनाथ शिंदे और 50 विधायकों का दावा है कि उन्होंने आधिकारिक तौर पर महाराष्ट्र के राज्यपाल को ठाकरे सरकार से समर्थन वापस लेने के बारे में सूचित किया है. अगर ऐसा होता है तो उद्धव ठाकरे को सीएम पद से इस्तीफा देना पड़ सकता है. अगर सीएम उद्धव ठाकरे इस्तीफा देते हैं तो इस परिस्थिति में राज्यपाल संभवतः भाजपा से सरकार बनाने का आह्वान करेंगे. इसके बाद भाजपा को विधानसभा में बहुमत साबित करना होगा. भाजपा शिंदे के प्रति वफादार विधायकों के कथित समर्थन से आगे बढ़ सकती है. यदि उद्धव ठाकरे इस्तीफा नहीं देते हैं, तो उन्हें विधानसभा में फ्लोर टेस्ट का सामना करना पड़ेगा.मुख्यमंत्री के लिए प्रतिद्वंद्वी गुट की संख्या को देखते हुए यह एक धूमिल संभावना है. अगर ठाकरे फ्लोर टेस्ट में विफल हो जाते हैं, तो सरकार गिर जाएगी, जिससे फिर से एक ऐसा परिदृश्य बन जाएगा जहां भाजपा को सरकार बनाने के लिए बुलाया जाएगा. लेकिन अगर भाजपा संख्या बढ़ाने में असमर्थ होती है, तो राज्य में राष्ट्रपति शासन की संभावना सबसे अधिक होगी, जैसा कि नवंबर 2019 में हुआ था. इस अवधि के दौरान सरकार बनाने के विकल्पों का पता लगाया जाता है और नए गठबंधन बनाए जा सकते हैं. हालांकि, अगर गतिरोध जारी रहता है, तो राज्य में नए विधानसभा चुनाव भी हो सकते हैं.दलबदल विरोधी कानूनदलबदल विरोधी कानून उन निर्वाचित प्रतिनिधियों को दंडित करता है जो अयोग्यता के साथ पार्टियों को बदलते हैं. सांसद और विधायक, हालांकि, कानून को दरकिनार कर सकते हैं, यदि उनकी संख्या विधायिका में पार्टी की ताकत के दो-तिहाई से अधिक या बराबर है. तब गुट किसी अन्य पार्टी में विलय कर सकता है या सदन में एक अलग समूह बना रह सकता है. शिंदे खेमे सहित 288 सदस्यीय विधानसभा में शिवसेना के 55 विधायक हैं. दलबदल विरोधी नियम से सुरक्षित रहने के लिए शिंदे को कम से कम 36 विधायकों की जरूरत है.ब्रेकिंग न्यूज़ हिंदी में सबसे पहले पढ़ें News18 हिंदी | आज की ताजा खबर, लाइव न्यूज अपडेट, पढ़ें सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट News18 हिंदी |Tags: Maharashtra, Uddhav thackeray

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