महाराष्ट्र की राजनीति के लिए सूरत आखिर कैसे बना एपिसेंटर?

Aajtak | 4 days ago | 23-06-2022 | 01:23 pm

महाराष्ट्र की राजनीति के लिए सूरत आखिर कैसे बना एपिसेंटर?

महाराष्ट्र में शुरू हुई सियासी उठापटक का एपिसेंटर गुजरात का सूरत शहर बना है. शिवसेना के बागी विधायकों को सूरत एयरपोर्ट के नजदीक ली मेरिडियन होटल में ठहराया जा रहा है. उसके बाद उन्हें गुवाहाटी भेजने के लिए विशेष व्यवस्था की जा रही है. सूरत पहुंचने वाले शिवसेना विधायकों को किसी तरह की तकलीफ ना हो इस बात का पूरा ध्यान सूरत भाजपा के नेता रख रहे हैं.अब ऐसे में सवाल ये खड़ा होता है कि अपनी विरोधी पार्टी शिवसेना के विधायकों को आखिर भाजपा संरक्षण क्यों दे रही है और संरक्षण देने के बावजूद वो ये कबूल क्यों नहीं कर रही है. इन सवालों के बीच आखिर गुजरात में सूरत ही क्यों एपिसेंटर बना है, इसके पीछे क्या तर्क है हम आपको बताते हैं.35 विधायक एक साथ सूरत पहुंच गए...महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव भाजपा के साथ गठबंधन में लड़ने वाली शिवसेना जब से एनसीपी और कांग्रेस के साथ गठबंधन कर सत्ता में आई है तब से लगातार भाजपा इस बात को हजम नहीं कर पा रही थी और ये बात किसी से छिपी नहीं है. महाराष्ट्र में होने वाली हर गतिविधि पर भाजपा लगातार नजर बनाकर रखी थी. वहां किसी भी मुद्दे पर किस तरह से सरकार को घेरा जाए उसके भी प्रयास निरंतर चालू रहते थे. इस बीच कहीं न कहीं शिवसेना के विधायकों में भी इस बात की नाराजगी जरूर थी कि भले ही पार्टी मुखिया उद्धव ठाकरे ने सरकार कांग्रेस और एनसीपी के साथ मिलकर बना ली हो, लेकिन यह होने ठीक नहीं लग रहा था. ये असंतोष धीरे-धीरे पार्टी में बढ़ता चला गया मगर उद्धव ठाकरे संभवत इस असंतोष से वाकिफ नहीं हुए और आखिरकार उनकी पार्टी में टूट पड़ गई. शिवसेना के बागी 35 विधायक एक साथ सूरत पहुंच गए थे और उद्धव ठाकरे को या उनकी सरकार को कानो कान भनक तक नहीं पड़ी.गुवाहाटी जाना महज संयोग नहीं...शिवसेना के बागी विधायकों का सूरत पहुंचना और फिर सूरत से गुवाहाटी जाना ये सिर्फ महज एक संयोग नहीं है बल्कि इस ऑपरेशन की तैयारी पिछले लंबे समय से चल रही थी. इस ऑपरेशन के पीछे गुजरात प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सीआर पाटील पूरी तरह से सक्रिय नजर आए. सीआर पाटील गुजरात की राजनीति का एक ऐसा चेहरा रहे हैं, जिन्हें जोजिम्मेदारी पार्टी ने सौंपी उसेउन्होंने बखूबी निभाया. नवसारी लोकसभा क्षेत्र से तीसरी बार सांसद बने सीआर पाटील को पार्टी ने गुजरात प्रदेश अध्यक्ष की जवाबदारी दी है, ये जानते हुए वो मूलरूप सेगुजराती नहीं हैं.सीआर पाटील (चंद्रकांत रघुनाथ पाटिल) मूलतः महाराष्ट्र के जलगांव के रहने वाले हैं. इस लिहाज से उनके महाराष्ट्र के नेताओं के साथ घनिष्ठ संबंध भी रहे हैं. इसी बात का फायदा महाराष्ट्र की वर्तमान राजनीति को बदलाव लाने में भी उन्हें मिला है. शिवसेना के अंदरूनी कलह से नाराज एकनाथ शिंदे और उनके समर्थन में आए विधायकों को सूरत लाकर उन्हें ठहरने खाने-पीने की व्यवस्था करना और उसके बाद उन्हें फ्लाइट के जरिए गुवाहाटी भेजने की सारी जिम्मेदारी सीआर पाटील ने अपने नजदीकी भाजपा नेताओं को सौंपी.परेश पटेल, अमित राजपूत लगे रहे विधायकों की आगवानी मेंसूरत महानगर पालिका में स्टैंडिंग कमिटी के चेयरमैन परेश भाई पटेल, शासक पक्ष नेता अमित राजपूत, डिप्टी मेयर दिनेश भाई जोधानी, भाजपा पार्षद दिनेश भाई राजपुरोहित और सूरत युवा मोर्चा के प्रमुख भाविन भाई टोपीवाला ये वो मुख्य नाम हैं जो महाराष्ट्र से सूरत आने वाले शिवसेना के बागी विधायकों की देखरेख और उनके लिए सारी सुख सुविधाएं उपलब्ध करवा रहे हैं.ये सभी नाम गुजरात प्रदेश भाजपा अध्यक्ष के बेहद करीबियों में से हैं.बीजेपी नेता तय कर रहे थे कौन विधायकों से मिलेगा21 जून की शाम करीब 8:00 बजे से सूरत शहर पुलिस में विधायकों के आने की खबर को लेकर हलचल मच गई थी. सूरत एयरपोर्ट रोड पर स्थित ली मेरिडियन होटल मैं ठहरने वाले सभी विधायकों कौन मिलेगा और कौन नहीं मिलेगा ये तय सूरत के भाजपा नेता कर रहे थे. उसी हिसाब से वह पुलिस को सूचना दे रहे थे कि किसको होटल में प्रवेश देना है और किसे नहीं देना है. अभी तक जितने भी शिवसेना के बागी विधायक सूरत पहुंचे हैं उन सभी को पहले ली मेरिडियन होटल में ले जाया गया और उसके बाद उन्हें गुवाहाटी भेजा गया. अभी भी सूरत भाजपा के उपरोक्त लिखित नामों वाले नेता होटल में डेरा डाले हुए हैं और पुलिस सुरक्षा अभी भी होटल में मौजूद है.गुजरात प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सीआर पाटील का होम टाउन सूरत होने के चलते शिवसेना के बागी विधायकों के ठहरने और उन्हें भाजपा शासित आसाम राज्य के गुवाहाटी भेजने की व्यवस्था उनके नेताओं के द्वारा की जा रही है. इस पूरे ऑपरेशन के पीछे सीआर पाटील ही है. इस लिहाज से महाराष्ट्र की राजनीति को लेकर सूरत एपिसेंटर बना हुआ है. इस ऑपरेशन के सफल होने के बाद सीआर पाटील का भाजपा में और भी कद बड़ा होगा, इसमें कोई दो राय नहीं है.

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