Maharashtra Political Crisis: विधायकों की बगावत के बीच महाराष्‍ट्र के सीएम उद्धव ठाकरे ने छोड़ा सरकारी आवास, अटकलों का बाजार गर्म

Jagran | 6 days ago | 22-06-2022 | 11:15 am

Maharashtra Political Crisis: विधायकों की बगावत के बीच महाराष्‍ट्र के सीएम उद्धव ठाकरे ने छोड़ा सरकारी आवास, अटकलों का बाजार गर्म

ओमप्रकाश तिवारी, मुंबई। शिवसेना ने आज साफ कर दिया है कि उद्धव ठाकरे फिलहाल मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा नहीं देंगे। यदि अवसर मिला तो वह विधानसभा में अपना बहुमत सिद्ध करके दिखाएंगे। लेकिन दूसरी ओर मुख्यमंत्री के सरकारी आवास 'वर्षा' से निकलने के पहले उद्धव ठाकरे ने वहां मौजूद विधायकों से भावुक होकर यह भी कहा कि जो जाना चाहे, जा सकता है।इस दौरान भारी संख्या में शिवसैनिक मातोश्री के बाहर मौजूद रहे। इस दौरान समर्थकों ने "उद्धव तुम आगे बढ़ो, हम तुम्हारे साथ हैं" का नारा लगाया। इस दौरान उनके साथ महाराष्ट्र के मंत्री आदित्य ठाकरे, उनकी पत्नी रश्मि ठाकरे औरबेटे तेजस ठाकरे भी साथ रहे।#WATCH Maharashtra CM Uddhav Thackeray along with his family leaves from his official residence, amid chants of "Uddhav tum aage badho, hum tumhare saath hain" from his supporters.#Mumbai pic.twitter.com/m3KBziToV6बुधवार को दिन भर चली राजनीतिक उठापटक के बीच देर शाम शिवसेना प्रवक्ता संजय राउत ने स्पष्ट कर दिया कि किसी ने भी मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को अपने पद से इस्तीफा देने की सलाह नहीं दी है। राउत ने राकांपा अध्यक्ष शरद पवार, कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष नाना पटोले, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कमलनाथ एवं बालासाहब थोरात द्वारा उद्धव ठाकरे को दिए गए समर्थन पर उनका आभार भी व्यक्त किया। राउत ने कहा कि मुख्यमंत्री को पद की कोई मोहमाया नहीं है। इसलिए वह अब मुख्यमंत्री का सरकारी बंगला 'वर्षा' छोड़कर अपनी निजी निवास 'मातोश्री' पर रहने जा रहे हैं। लेकिन राउत का यह बयान आने के कुछ घंटे पहले खुद उन्होंने ही ट्वीट किया था कि महाराष्ट्र का राजनीतिक घटनाक्रम विधानसभा भंग करने की ओर बढ़ रहा था।Maharashtra Political Crisis: शिवसेना के बागी मंत्री एकनाथ शिंदे के पास हैं सिर्फ 3 विकल्प, जानें क्या कहते हैं संविधान विशेषज्ञ यह भी पढ़ें संजय राउत का यह ट्वीट एवं मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे का अपना सरकारी बंगला छोड़ना इस बात का संकेत है कि शिवसेना को सत्ता जाने का आभास हो गया है। लेकिन वह इस्तीफा देकर सत्ता नहीं जाने देना चाहते। वह विधानसभा में अपना बहुमत सिद्ध करने का मौका छोड़ना नहीं चाहते। यानी संघर्ष करते हुए दिखना चाहते हैं। राउत ने अपने एक ट्वीट में इस बात के भी संकेत दिए हैं। उन्होंने लिखा है कि हां, संघर्ष करेंगे। राउत ने प्रेस से भी बात करते हुए कहा कि हम लड़ने वाले लोग हैं। अंतिम विजय सत्य की ही होगी। लेकिन शिवसेना की बदली रणनीति का कारण विधानसभा उपाध्यक्ष राकांपा का होना है।Maharashtra Political Crisis: सरकार पर मंडरा रहे खतरे के बीच जनता से बोले उद्धव ठाकरे, मैं मुख्यमंत्री और शिवसेना प्रमुख का पद छोड़ने को तैयार - 10 बड़ी बातें यह भी पढ़ें क्या होगा भावनात्मक अपील का असर महाविकास आघाड़ी मान रही है कि यदि विधानसभा में बहुमत सिद्ध करने की नौबत आई तो उपाध्यक्ष कई तकनीकी कारण बताकर भाजपा और एकनाथ शिंदे के मंसूबों पर पानी फेर सकते हैं, या नई सरकार बनने में अधिक से अधिक विलंब कर सकते हैं। क्योंकि गुवाहाटी में एकनाथ शिंदे के साथ अभी भी सिर्फ शिवसेना के इतने विधायक नजर नहीं आ रहे हैं कि वे दलबदल कानून का दायरा से बाहर हो गए हों, और अपने समर्थक विधायकों का एक अलग गुट बनाकर उसे ही असली शिवसेना साबित कर सकें। एकनाथ शिंदे के साथ 20 जून की रात सूरत गए विधायकों में से कुछ वापस उद्धव के खेमे में लौट चुके हैं। इसलिए उद्धव को यह उम्मीद भी है कि उनकी भावनात्मक अपील काम कर गई तो शिंदे के खेमे में गए कुछ विधायक और वापस आ सकें तो शिंदे को दलबदल कानून का दायरा तोड़ने में मुश्किल हो सकती है।

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