Maharashtra Political Crisis: क्या है दल बदल विरोधी कानून? क्या बागी शिवसैनिकों की विधायकी खतरे में

Jagran | 5 days ago | 22-06-2022 | 05:43 am

Maharashtra Political Crisis: क्या है दल बदल विरोधी कानून? क्या बागी शिवसैनिकों की विधायकी खतरे में

नोएडा, आनलाइन डेस्क। महाराष्ट्र में मचे सियासी भूचाल के बीचशिवसेना के बागी नेता और महाराष्ट्र के कैबिनेट मंत्री एकनाथ शिंदे के 40 विधायकों के समर्थन का दावा करने के बाद पार्टी विधायकों को अल्टीमेटम जारी किया गया है और गठबंधन के तीन सहयोगियों कांग्रेस, एनसीपी और शिवसेना द्वारा बैक-टू-बैक बैठकें की जा रही हैं। शिवसेना के मुख्य सचेतक सुनील प्रभु ने पार्टी के सभी विधायकों को एक पत्र जारी कर बुधवार शाम को होने वाली एक महत्वपूर्ण बैठक में उपस्थित रहने को कहा है।Eknath Shinde Untold Story: बेटा-बेटी की मौत देख राजनीति छोड़ चुके थे शिंदे, जानें उद्धव की कुर्सी हिलाने वाले एकनाथ की पूरी कहानी यह भी पढ़ें बागी विधायकों में 33 शिवसेना के और सात निर्दलीय विधायक हैं। कानून में कुछ ऐसी विशेष परिस्थितियों का उल्लेख किया गया है, जिनमें दलबदल पर भी सदस्य को अयोग्य घोषित नहीं किया जा सकता। दल बदल विरोधी कानून के मुताबिक, एक राजनीतिक दल को किसी अन्य राजनीतिक दल में या उसके साथ विलय की अनुमति है बशर्ते उसके कम से कम दो तिहाई विधायक विलय के पक्ष में हों।मतलब, अगर किसी पार्टी से दो तिहाई सदस्य टूटकर दूसरी पार्टी में जाते हैं तो उनका पद बना रहेगा, यानी विधायक का पद बचा रहेगा, लेकिन अगर संख्या इससे कम होती है तो उन्हें विधायक के पद से इस्तीफा देना पड़ेगा। ऐसे में न तो दलबदल रहे सदस्यों पर कानून लागू होगा और न ही राजनीतिक दल पर। इसके अलावा सदन का अध्यक्ष बनने वाले सदस्य को इस कानून से छूट प्राप्त है।Mumbai News:मुंबई के होटलों में महिला से करता रहा दुष्कर्म, आरोपित पुलिसवाले पर दर्ज हुई FIR यह भी पढ़ें महाराष्ट्र की बात की जाए तो विधानसभा में शिवसेना के पास 55 विधायक हैं, अगर बागी विधायक विलय करना चाहते हैं तो 55 का दो तिहाई, यानी 37 विधायकों को एक साथ दूसरी पार्टी में जाना होगा। अगर ऐसा होता है तो उन विधायकों पर कोई संवैधानिक कार्रवाई नहीं होगी। उनकी योग्यता बनी रहेगी।जानें क्या है दल बदल विरोधी कानूनMaharashtra Political Crisis: एकनाथ शिंदे क्यों चाहते हैं एमवीए गठबंधन टूटे? राज्यपाल को भेजे पत्र से हुआ खुलासा यह भी पढ़ें वर्ष 1985 में 52वें संविधान संशोधन के माध्यम से देश में ‘दलबदल विरोधी कानून’ पारित किया गया और इसे संविधान की दसवीं अनुसूची में जोड़ा गया। इस कानून का मुख्य उद्देश्य भारतीय राजनीति में दलबदल की कुप्रथा को समाप्त करना था। इस कानून के तहत किसी जनप्रतिनिधि को अयोग्य घोषित किया जा सकता है यदि:इसलिए पड़ी जरूरत, समस्या जस की तसMaharashtra Political Crisis: मातोश्री के बाहर उमड़े उद्धव ठाकरे के समर्थकों के हुजूम ने की नारेबाजी, देखें वीडियो यह भी पढ़ें समझें, महाराष्ट्र विधानसभा का अंकगणितःUddhav Thackeray FB Live: जब शिंदे थे शिवसेना का सीएम चेहरा तो आप क्यों बने थे मुख्यमंत्री, उद्धव ठाकरे ने बताया सच यह भी पढ़ें महाविकास आघाड़ी -शिवसेना - 55राकांपा - 53कांग्रेस - 44(कुल विधायक - 152)भाजपा - 106छोटी पार्टियां एवं निर्दलीयःबहुजन विकास आघाड़ी - 03समाजवादी पार्टी - 02प्रहार जनशक्ति पार्टी - 02महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना - 01जन सुराज्य पार्टी - 01राष्ट्रीय समाज पक्ष - 01भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) - 01निर्दलीय - 16***********भाजपा के अपने 106 विधायकों के साथ उसके समर्थक 06 निर्दलीय मिलाकर उसकी ताकत 112 तक पहुंचती है, लेकिन पिछले राज्यसभा चुनाव में उसे 123 विधायकों का समर्थन मिला। जबकि एक दिन पहले हुए विधान परिषद चुनाव में 134 विधायक उसके साथ नजर आए। जबकि महाराष्ट्र विधानसभा में सरकार बनाने के लिए 145 विधायकों की संख्या आवश्यक होती है। जितनी बड़ी संख्या में निर्दलीय शिवसेना के बागी नेता एकनाथ शिंदे के साथ नजर आ रहे हैं, यदि वे सभी भाजपा के साथ आ जाएं तो राज्य की राजनीति में बड़ी उलटफेर होते देर नहीं लगेगी।

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