Maharashtra Political Crisis: अब किस ओर बढ़ेगी महाराष्‍ट्र की सियासत, जानें क्‍या कहते हैं विशेषज्ञ

Jagran | 5 days ago | 23-06-2022 | 07:21 am

Maharashtra Political Crisis: अब किस ओर बढ़ेगी महाराष्‍ट्र की सियासत, जानें क्‍या कहते हैं विशेषज्ञ

मुंबई, पीटीआइ/जेएनएन। शिवसेना नेता एकनाथ शिंदे के बागी तेवरों से महाराष्ट्र में मची खींचतान ने पूरे देश के सियासी माहौल को गरमा दिया है। यही नहीं शिवसेना सांसद संजय राउत के ताजा बयान ने भी इस सियासी सरगर्मी में आग में घी डालने का काम किया है। संजय राउत ने कहा कि यदि असम में डेरा डालने वाले बागी विधायकों का समूह 24 घंटे में मुंबई लौटता है और उद्धव ठाकरे से चर्चा करता है तो शिवसेना महा विकास आघाड़ी की सरकार छोड़ने के लिए भी तैयार है। इस बयान के कई सियासी मायने निकाले जा रहे हैं...Maharashtra Political Crisis: निशाने पर आए अजित पवार, शिवसेना और कांग्रेस के नेताओं ने विकास निधि रोकने का आरोप लगाया यह भी पढ़ें एक संवैधानिक विशेषज्ञ का मानना है कि महाराष्ट्र विधानसभा के उपाध्यक्ष नरहरि जिरवाल (Narhari Zirwal) की ओर से अजय चौधरी को बागी नेता एकनाथ शिंदे के स्थान पर सदन में शिवसेना का नेता नियुक्त करने से स्थितियां फ्लोर टेस्ट की ओर बढ़ गई हैं। महाराष्ट्र के पूर्व महाधिवक्ता श्रीहरि अणे ने कहा कि शिंदे के नेतृत्व में बागी विधायकों का समूह दावा कर सकता है कि वह मौजूदा महा विकास अघाड़ी सरकार को वह समर्थन नहीं करता है। इससे अविश्वास प्रस्ताव लाए जाने की संभावनाएं बढ़ेंगी।श्रीहरि अणे ने कहा कि चौधरी को शिंदे की जगह सदन में शिवसेना समूह के नेता के रूप में नियुक्त करने का निर्णय अविश्वास प्रस्ताव की प्रक्रिया की आहट का संकेत है। शिवसेना के नेतृत्व वाली एमवीए सरकार यह कह सकती है कि उसके पास बहुमत साबित करने और विश्वास मत साबित करने के लिए पर्याप्त संख्या मौजूद है। एक बार यह पूरी तरह से स्थापित हो जाने के बाद कि विद्रोही गुट के पास पर्याप्त संख्या है, शक्ति परीक्षण के रास्ते खुलने शुरू होंगे।Maharashtra Political Crisis: महाराष्ट्र के राजनीतिक संकट से भाजपा ने बनाई दूरी, सरकार बनाने के लिए पहल करने से क्यों बच रही है पार्टी यह भी पढ़ें ऐसे में जब शिंदे ने दावा किया है कि वहीं असली शिवसेना के प्रमुख हैं तो बागियों के खिलाफ संभावित दल बदल कार्रवाई पर भी नजरें होंगी। श्रीहरि अणे ने कहा कि विधायकों को खुद को अयोग्यता से बचाने के लिए एक राजनीतिक दल के तौर पर दो तिहाई संख्या की भी दरकार होगी। संविधान विशेषज्ञ और लोकसभा के पूर्व महासचिव सुभाष कश्यप कहते हैं कि यदि शिवसेना के अधिकांश सदस्य यदि एकनाथ शिंदे के साथ हैं तो वह नए दल बनाकर भी सत्ता में आ सकते हैं।

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