Mumbai News: MMRCL ने सुप्रीम कोर्ट में बताया- मेट्रो कार शेड प्रोजेक्ट के लिए 'आरे' में नहीं हो रही पेड़ों की कटाई

Jagran | 1 week ago | 05-08-2022 | 03:00 am

Mumbai News: MMRCL ने सुप्रीम कोर्ट में बताया- मेट्रो कार शेड प्रोजेक्ट के लिए 'आरे' में नहीं हो रही पेड़ों की कटाई

मुंबई, एजेंसी। मुंबई के आरे वन क्षेत्र में मेट्रो कार शेड के निर्माण के खिलाफ दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में आज यानी शुक्रवार को सुनवाई हुई। मुंबई मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (MMRCL ) ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि साल 2019 के आदेश के बाद से ही आरे वन क्षेत्र में पेड़ों की कटाई पर रोक लगा दी गई है। साथ ही MMRCL ने आश्वासन देते हुए कहा कि अगले आदेश तक पेड़ नहीं काटे जाएंगे।10 अगस्त को होगी अगली सुनवाईबीते गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने मुंबई के आरे कालोनी में पेड़ों को काटने को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के लिए हामी भरी थी। आज इसी मामले पर सुनवाई हुई जिसमें MMRCL की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने उच्च अदालत को भरोसा दिलाते हुए कहा कि 2019 के ऑर्डर के बाद से मेट्रो कार शेड के लिए आरे वन क्षेत्र में कोई पेड़ नहीं काटे गए हैं।सुप्रीम कोर्ट ने MMRCL का बयान रिकॉर्ड में लेते हुए पेड़ों की कटाई के खिलाफ दायर मामले की सुनवाई 10 अगस्त के लिए स्थगित कर दी।Maharashtra: भाजपा के साथ सरकार बनाने को तैयार थे उद्धव ठाकरे, शिंदे गुट के नेता ने किया दावा यह भी पढ़ें SG Tushar Mehta, appearing for MMRCL, assures SC that no trees cut since 2019 and will not be cut in the Aarey area till next date of hearing. Supreme Court takes into record the statement and posts the case filed against cutting of trees for hearing to August 10छात्र की याचिका पर SC ने लिया था संज्ञानबता दें कि साल 2019 में कानून के छात्र ऋषभ रंजन ने आरे कालोनी में मेट्रो कार शेड प्रोजेक्ट के तरहत पेड़ों की कटाई पर रोक लगाने की मांग करते हुए भारत के मुख्य न्यायाधीश को संबोधित एक याचिका दी थी, जिसपर सुप्रीम कोर्ट स्वत: संज्ञान लिया था।Kedar Dighe: शिवसेना नेता केदार दिघे की बढ़ सकती हैं मुश्किलें, मुंबई पुलिस ने दुष्कर्म मामले में किया तलब यह भी पढ़ें 7 अक्टूबर, 2019 को सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र राज्य को आरे वन क्षेत्र में कोई और पेड़ नहीं काटने और यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया था। इसके बावजूद लगातार पेड़ो की कटाई की शिकायत मिल रही थी।

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