सिंधिया, पायलट और अब शिंदे... किस तरह 'असंतोष की आग' बन जाती है बीजेपी के लिए मौका

News18 | 3 days ago | 23-06-2022 | 07:05 am

सिंधिया, पायलट और अब शिंदे... किस तरह 'असंतोष की आग' बन जाती है बीजेपी के लिए मौका

नई दिल्लीः ज्योतिरादित्य सिंधिया, सचिन पायलट और अब एकनाथ शिंदे… भाजपा की 24×7 राजनीति का एक पहलू ये भी है कि वो विपक्षी दलों में असंतुष्ट नेताओं की हर हरकत पर पैनी नजर रखती है. मौका मिलते ही भावनाओं का ऐसा मसाला डालती है कि सामने वाले को सोचने-समझने का मौका ही नहीं मिलता. 2020 में मध्य प्रदेश में ऐसी ही कवायद बखूबी काम कर गई और कांग्रेस को सत्ता गंवानी पड़ी. लेकिन 2020 में राजस्थान में योजना परवान नहीं चढ़ सकी क्योंकि सीटों का अंतर बहुत ज्यादा था. और अब लगता है कि महाराष्ट्र में भी दांव काम कर रहा है. उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली महाविकास अघाड़ी (एमवीए) सरकार महासंकट में घिर गई है.मध्य प्रदेश और राजस्थान में कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं की अधूरी महत्वाकांक्षाओं की वजह से जो आग उनके अंदर आग सुलग रही थी, भाजपा ने उसे हवा देने का काम किया. शिंदे का मामला भी कुछ ऐसा ही नजर आ रहा है. शिंदे शिवसेना पर सिद्धांतों से भटकने का आरोप लगा रहे हैं और सत्ता के लिए कांग्रेस-एनसीपी के साथ हाथ मिलाकर हिंदुत्व के मूल आदर्शों को किनारे रख देने का दावा कर रहे हैं.एमपीः कमलनाथ से सिंधिया खफा, गिरी सरकारमध्य प्रदेश में 2020 में ज्योतिरादित्य सिंधिया में तत्कालीन मुख्यमंत्री कमल नाथ के खिलाफ असंतोष का लावा अंदर ही अंदर सुलग रहा था. वह कमलनाथ के मुख्यमंत्री और पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष का पद दोनों रखने से नाराज़ थे जबकि राज्य में कांग्रेस की जीत में सिंधिया की भी अहम भूमिका थी. वह मुख्यमंत्री पद के बड़े दावेदार भी माने जा रहे थे. लेकिन कुर्सी मिली कमलनाथ को. उसके बाद कमलनाथ का सिंधिया को लगातार नीचा दिखाना, नई सरकार का वादों को पूरा न करना जैसे आरोपों ने सिंधिया का मोहभंग कर दिया. सिंधिया परिवार से पुराने संबंधों की बदौलत भाजपा ने इसे हवा दी, सिंधिया फिर से बीजेपी में आ गए और कमलनाथ सरकार धराशायी हो गई.राजस्थानः सचिन पायलट ने आवाज उठाई, पर…राजस्थान में भी 2020 में सचिन पायलट और अशोक गहलोत के बीच इसी तरह की अनबन हुई. यहां तक कि सार्वजनिक तौर पर भी दोनों एकदूसरे से खिंचे-खिंचे नजर आते थे. मुख्यमंत्री पद को लेकर भी दोनों के बीच तनातनी हुई. सचिन पायलट ने नजरअंदाज करने का आरोप लगाया. यहां तक कि बाद में, उनसे पार्टी प्रदेशाध्यक्ष का पद भी ले लिया गया. भाजपा लगातार अंदरखाने कोशिश में रही कि इसका फायदा उठाया जाए. उसने प्रयास भी किए. लेकिन सत्ता तक पहुंचने के लिए सीटों का अंतर इतना बड़ा था कि भाजपा उससे पार नहीं पा सकी. इसलिए राजस्थान में सत्ता कांग्रेस के पास ही रही. सचिन पायलट ने भी कांग्रेस का हाथ नहीं झटका. लेकिन बीजेपी ने उम्मीद नहीं छोड़ी है. सचिन पायलट भी बड़ी भूमिका के इंतजार में हैं.महाराष्ट्रः शिंदे की उम्मीदों से उद्धव संकट मेंमहाराष्ट्र में गठबंधन सरकार के खिलाफ मोर्चा बुलंद करने वाले एकनाथ शिंदे के अंदर भी काफी समय से नाराजगी का गुबार उठ रहा था. उनकी कई अधूरी आकांक्षाएं भी हैं. उद्धव ठाकरे के मुख्यमंत्री बनने से पहले उन्हें मुख्यमंत्री पद का दावेदार बताया जा रहा था. इसके अलावा शिंदे की नाराजगी शिवसेना के कांग्रेस-एनसीपी से गठबंधन करने को लेकर भी थी. शिवसेना और कांग्रेस एनसीपी के राजनीतिक रास्ते पहले बिल्कुल अलग रहे थे, दशकों तक वो एकदूसरे के खिलाफ खड़े रहे थे. एकनाथ शिंदे लगातार आरोप लगा रहे हैं कि शिवसेना ने सत्ता हासिल करने के लिए बाल ठाकरे के दौर के हिंदुत्व को छोड़ दिया है. भाजपा को इसमें मौका नजर आया. उसने कथित तौर पर शिंदे के साथ पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के संबंधों का इस्तेमाल किया. भाजपा-शिवसेना की पिछली सरकार में शिंदे फडणवीस की कैबिनेट में थे. शिवसेना में लगातार अपनी अनदेखी से खफा शिंदे को भी ये मौका भुनाने का सही वक्त नजर आ रहा है. देखना होगा कि भाजपा के लिए ये कितना फायदे का सौदा रहता है.अगला नंबर छत्तीसगढ़, झारखंड का है?महाराष्ट्र में सियासी उथलपुथल की टाइमिंग भी गौर करने वाली है. सत्ता में सहयोगी कांग्रेस पार्टी अपने नेता राहुल गांधी से ईडी की पूछताछ और गिरफ्तार किए जाने की आशंका के चलते कार्यकर्ताओं को एकजुट करने में लगी है. ईडी ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को भी समन कर रखा है. महाराष्ट्र के विधान परिषद चुनावों में पर्याप्त संख्या बल न होने के बावजूद बीजेपी के खाते में 5 सीटें आई हैं. एकनाथ शिंदे को ये अपने तेवर दिखाने का सबसे सही अवसर लगा. उन्होंने असंतुष्ट विधायकों को इकट्ठा करके उद्धव सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया. अब शिवसेना, कांग्रेस और एनसीपी सरकार बचाने के लिए हाथ-पैर मार रही हैं. कांग्रेस ने हालात संभालने के लिए वरिष्ठ नेता कमलनाथ को मोर्चे पर भेजा है. शरद पवार भी जुटे हुए हैं. देखना होगा कि सियासत की इस राजनीति में सत्ता का ऊंट किस करवट बैठता है. हालांकि महाराष्ट्र के हालात देखकर अब छत्तीसगढ़ और झारखंड जैसे राज्यों में भी सियासी हलकों में हलचल शुरू हो गई है.ब्रेकिंग न्यूज़ हिंदी में सबसे पहले पढ़ें News18 हिंदी | आज की ताजा खबर, लाइव न्यूज अपडेट, पढ़ें सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट News18 हिंदी |Tags: BJP, Congress, Maharashtra, Shivsena

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