पार्टी सिंबल पर दावा कर सकते हैं शिंदे, क्या ठाकरे हार जाएंगे अपना 'तीर-कमान'

News18 | 5 days ago | 23-06-2022 | 04:05 pm

पार्टी सिंबल पर दावा कर सकते हैं शिंदे, क्या ठाकरे हार जाएंगे अपना 'तीर-कमान'

नई दिल्ली. महाराष्ट्र के ताज़ा राजनीतिक घटनाक्रम से ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे चारों तरफ से घिर गए हैं. शिवसेना के बागी नेता एकनाथ शिंदे लगातार पार्टी पर अपनी पकड़ मजबूत कर रहे हैं. उन्होंने दावा किया है कि शिवसेना के 40 विधायक उनके साथ हैं. इसके अलावा कई निर्दलीय विधायक भी उनके खेमे में हैं. लिहाजा अब शिवसेना में दोफाड़ के आसार बनते दिख रहे हैं. ऐसे में अब कहा जा रहा है कि पार्टी में चुनाव चिह्न और झंडे को लेकर भी घमासान शुरू हो सकता है.कहा जा रहा है कि एकनाथ शिंदे खेमा अब शिवसेना के ‘धनुष और बाण’ चिह्न पर दावा करने की तैयारी कर रहा है. सूत्रों ने गुरुवार को News18 को बताया कि गुट 41 विधायकों के समर्थन का दावा कर रहा है और पार्टी के चुनाव चिह्न के इस्तेमाल की मांग कर रहा है. कहा जा रहा है कि जल्द ही ये मामला चुनाव आयोग पहुंच सकता है. आखिर क्या है पार्टी सिंबल का कानून? क्या दूसरा गुट इस पर कब्जा कर सकता है. आइए वि्स्तार से इसे समझते हैं….क्या कहता है कानून?बता दें कि चुनाव आयोग राजनीतिक पार्टियों को मान्यता देता है और चुनाव चिह्न भी आवंटित करता है. चुनाव चिह्न (आरक्षण और आवंटन) आदेश, 1968 के मुताबिक ये पार्टियों को पहचानने और चुनाव चिह्न आवंटित करने से जुड़ा है. कानून के मुताबिक अगर पंजीकृत और मान्यता प्राप्त राजनीतिक पार्टी के दो गुटों में सिंबल को लेकर अलग-अलग दावें किए जाएं तो फिर चुनाव आयोग इस पर आखिरी फैसला करता है. आदेश के अनुच्छेद 15 में इस पर विस्तार से जानकारी दी गई है.मानना होगा आयोग का फैसलाजब एक ही पार्टी के दो गुट एक सिंबल के लिए दावा करते हैं तो ऐसे हालात में चुनाव आयोग दोनों खेमों को बुलाता है. दोनों पक्ष अपनी दलीलें रखते हैं. इसके बाद आयोग की तरफ से फैसला लिया जाता है. लेकिन याद रहे कि चुनाव आयोग का फैसला हर हाल में पार्टी के गुटों को मानना होगा.इन फैक्टर पर होता है फैसलाविवाद के मामले में, चुनाव आयोग मुख्य रूप से पार्टी के संगठन और उसकी विधायिका विंग दोनों के भीतर प्रत्येक गुट के समर्थन का आकलन करता है. ये राजनीतिक दल के भीतर शीर्ष समितियों और निर्णय लेने वाले निकायों की पहचान करता है. ये पता लगाने की कोशिश की जाती है कि कितने सदस्य या पदाधिकारी किस गुट में वापस आ गए हैं. इसके बाद ये प्रत्येक कैंप में सांसदों और विधायकों की संख्या की गणना करता है.पार्टी सिंबल के इस्तेमाल पर लग सकती है रोकअगर चुनाव आयोग एक गुट का निर्धारण करने में असमर्थ रहता है तो फिर वो पार्टी के सिंबल को फ्रीज कर सकता है. इसके बाद दोनों गुटों को दोबारा नए नामों और सिंबल के साथ रजिस्ट्रेशन करने के लिए कह सकता है. चुनाव नजदीक होने की स्थिति में गुटों को एक अस्थायी चुनाव चिह्न चुनने के लिए कह सकता है.ब्रेकिंग न्यूज़ हिंदी में सबसे पहले पढ़ें News18 हिंदी | आज की ताजा खबर, लाइव न्यूज अपडेट, पढ़ें सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट News18 हिंदी |Tags: Election Commission of India, Uddhav thackeray

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