शिवसेना ने मुखपत्र सामना में खड़े किए सवाल, पूछा- महोत्सव में जनता के लिए आजादी का अमृत कहां है ?

India | 5 days ago | 05-08-2022 | 08:56 am

शिवसेना ने मुखपत्र सामना में खड़े किए सवाल, पूछा- महोत्सव में जनता के लिए आजादी का अमृत कहां है ?

शिवसेना (Shivsena) ने अपने मुख पत्र सामना (Saamna Editorial) के माध्यम से देश भर में मनाए जा रहे आजादी के अमृत महोत्सव (Azadi Ka Amrit Mahotsav) को लेकर सवाल खड़े किए. संपादकीय लेख (Saamna Editorial Article) में कहा गया कि एक ओर प्रधानमंत्री मोदी (PM Modi) देश भर को तिरंगा लहराने की बात कर रहे हैं तो वहीं दूसरी ओर जम्मू कश्मीर की अलगाववादी नेता महबूबा मुफ्ती (Mehbooba Mufti) कश्मीर का अलग ध्वज (Kashmiri Flag) फहरा रही हैं. संपादकीय में सवाल किया गया क्या प्रधानमंत्री उनके खिलाफ कोई कार्रवाई करेंगे?. आरोप लगाते हुए कहा गया कि केंद्र सरकार राष्ट्रवाद (Nationalism) की बात कहती है लेकिन शिवसेना (Shivsena) जैसी राष्ट्रवादी पार्टी को नष्ट करना चाहती है.Also Read - National Anthem Facts: बंगाली भजन के पहले छंद से हुई है राष्ट्रगान की उत्पति, क्या आपको पता हैं ये रोचक बातेंलेख में हमलावर होते हुए टिप्पणी की गई कि महबूबा मुफ्ती (Mehbooba Mufti) ने राष्ट्र का अपमान किया है लेकिन केंद्र उनपर करवाई करने के बदले सरकार सामना (Saamna) और नेशनल हेराल्ड (National Herald) जैसे राष्ट्र सेवा में लगे अखबारों को बंद करने में लगी है. चुनौती देते हुए कहा गया कि अलगाववाद का विष (Separatist Ideology) घोलनेवाली और अपने ट्विटर अकाउंट पर ‘कश्मीर का ध्वज’ (Kashmiri Flag) लहरानेवाली महबूबा को हाथ लगाने की हिम्मत केंद्र सरकार में नहीं है. लेख के माध्यम से सवाल किया गया कि एक ओर चीन भारतीय सीमा में घुसा है, दूसरी ओर अलगाववादी अपना अलग ध्वज लहरा रहे हैं, ऐसे में आम लोगों के लिए अमृत कहां हैं ?. Also Read - Taal Thok Ke: वारिस पठान बोले मैं सबसे बड़ा ‘देशभक्त’ हूँ, तो Aditi Tyagi ने कसा तंज | Watch Video Also Read - Har Ghar Tiranga Song: रिलीज हुआ 'हर घर तिरंगा' सॉन्ग, अमिताभ-विराट और प्रभास जैसे सितारों से सजा है गाना‘अलगाववादियों का उत्सव : आजादी का अमृत महोत्सव कहां है?’ ‘आजादी का अमृत महोत्सव भाजपा का निजी आंदोलन बन गया है. वास्तविक अमृत महोत्सव में देश के रोटी-कपड़ा और मकान की समस्या बरकरार है. मुख्यत: व्यक्तिगत आजादी का गला रोज घोंटा जा रहा है. ‘नेशनल हेरॉल्ड’ का कार्यालय सील करना, यह तो आजादी की लड़ाई के महान पर्व की हत्या करने जैसा ही मामला है. कश्मीर में पंडितों का पलायन और हत्या हो रही है. अलगाववादी सोशल मीडिया में अपने झंडे लहरा रहे हैं और दिल्ली में आजादी की मशाल जलानेवाले ‘यंग इंडिया’, ‘नेशनल हेरॉल्ड’ को ही ताला लगा दिया गया है. मुंबई में संजय राऊत को ‘ईडी’ द्वारा फंसाकर ‘सामना’ की आवाज और लड़ाई को रोकने का प्रयास चल रहा है. ‘हेरॉल्ड’ और ‘सामना’ ये दोनों माध्यम प्रखर राष्ट्रवादी हैं और महत्वपूर्ण हैं. परंतु किसी दौर में भाजपा के कंधे से कन्धा सटाकर राजनीति करनेवाली, अलगाववाद का विष आज भी घोलनेवाली तथा अपने ‘ट्विटर’ अकाउंट पर ‘कश्मीर का ध्वज’ लहरानेवाली महबूबा को हाथ लगाने की हिम्मत केंद्र सरकार में नहीं है.  हिम्मत की बात की जाए तो आजादी के अमृत महोत्सव में प्रधानमंत्री मोदी और गृहमंत्री अमित शाह को पाक द्वारा हथियाए गए हमारे कश्मीर में कदम रखना था. साथ में महाराष्ट्र के नवमर्द शिंदे, केसरकर, सामंत, भुसे को ले जाना चाहिए था. भाजपा के फेर में पड़कर शिवसेना में फूट डालने के बाद से ‘नवमर्दों’ के इस समूह में भी हिंदुत्व का बड़ा जोश आ रहा है. इसलिए आजादी के अमृत महोत्सव में इस उत्साहित अलगाववादी समूह के साथ पाक व्याप्त कश्मीर में कदम रखकर देश के समक्ष आदर्श निर्माण करने की आवश्यकता है. ऐसा हम क्यों कह रहे हैं? क्योंकि चीन के विरोध के बाद भी अमेरिका की नैंसी पेलोसी ने ताइवान की जमीन पर कदम रखा. ताइवान चीन का हिस्सा है, इस मान्यता को खारिज कर दिया व अमेरिकी लोग ताइवान में घुस गए. चीन ने अमेरिका को चेतावनी देने के अलावा क्या किया?यहां हमारे देश के लद्दाख की जमीन पर चीनी सेना घुसकर बैठी है और 38 हजार वर्ग किमी की जमीन पर कब्जा कर लिया है. कश्मीर में अलगाववादियों का झंडा लहराया और हम राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ छापेमारी और गिरफ्तारी करने में ही श्रेष्ठता मान रहे हैं. चीनी सेना यहीं है और महबूबा की ‘डीपी’ पर ‘कश्मीर’ का ध्वज भी वैसे ही है. देश में अलगाववादियों का इस तरह से ‘उत्सव’ चल रहा है. आजादी का अमृत महोत्सव केंद्र के सत्ताधारियों का ‘दलीय’ कार्यक्रम बन गया है. परंतु देश की आम जनता के लिए आजादी का अमृत कहां है? इस सवाल का जवाब ढूंढ़ रहे हैं.’

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