महाराष्ट्र गंवाने के बाद मुंबई बचाने की कोशिश?आज BMC पार्षदों से मिलेंगे उद्धव

News18 | 3 days ago | 24-06-2022 | 04:05 pm

महाराष्ट्र गंवाने के बाद मुंबई बचाने की कोशिश?आज BMC पार्षदों से मिलेंगे उद्धव

प्रज्ञा कौशिका/मुंबई: शिवसेना के साथ चल रहे राजनीतिक संकट के बीच अपने कैडर को एकजुट रखने के अंतिम प्रयास में, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री और शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने शुक्रवार शाम को बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) के पार्षदों की मीटिंग बुलाई है. इससे पहले शुक्रवार दोपहर को उद्धव ठाकरे ने शिवसेना के सभी जिलाध्यक्षों के साथ बैठक कर यह जानने की कोशिश की कि पार्टी कैडर कहां खड़ा है. अधिकांश शिवसेना विधायकों के एकनाथ शिंदे खेमे में चले जाने के साथ, सभी की निगाहें शिवसेना पार्षदों के साथ उद्धव ठाकरे की बैठक पर टिकी हैं.एक सूत्र ने कहा कि विधायकों और सांसदों के बाद, शिवसेना के भीतर अगला बड़ा विभाजन बीएमसी के नगरसेवकों के बीच होने जा रहा है. शिवसेना नेताओं का भी दावा है कि अक्टूबर-नवंबर में होने वाले बीएमसी चुनावों पर इसका असर पड़ेगा, जिससे पार्टी को और नुकसान हो सकता है. बीएमसी पर 1989 से शिवसेना का शासन है. पार्टी को असली ताकत, देश के सबसे अमीर नागरिक निकाय बीएमएसी पर उसके नियंत्रण से ही मिलती है.सिर्फ बीएमसी पार्षदों की बैठक ही क्यों?शिवसेना और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सूत्रों का मानना ​​है कि एकनाथ शिंदे का ठाणे, कल्याण-डोंबिवली और उल्हासनगर में दबदबा है, जबकि नवी मुंबई भाजपा का गढ़ रहा है. तो एकमात्र निगम जो अभी भी उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना के साथ हो सकता है, वह है बीएमसी. शिवसेना के एक नेता ने कहा कि बीएमसी में 84 निर्वाचित पार्षद थे, जो बढ़कर 99 हो गए. शिवसेना में पड़ी टूट ने भाजपा को आगामी बीएमसी चुनाव में मेयर पद पर बढ़त हासिल हो गई है. ठाणे नगर निगम में, उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाले शिवसेना नेताओं का भी कहना है कि उनका सफाया हो जाएगा.शिवसेना के एक अंदरूनी सूत्र ने कहा, ‘ठाणे, नवी मुंबई, कल्याण और उल्हासनगर पर जबरदस्त प्रभाव पड़ेगा. ठाणे, कल्याण और डोंबिवली में हमारा सफाया हो जाएगा, जबकि नवी मुंबई बीजेपी के खाते में जाएगी. हम पहले से ही नुकसान का अनुमान लगा रहे हैं. अगर पार्टी में स्पष्ट विभाजन होता है तो बीएमसी में जरूर प्रभाव पड़ेगा. हालांकि, मुंबई में मामूली नुकसान होगा. विधायक टूट गए हैं, कार्यकर्ता नहीं. वास्तविक कार्यकर्ता अब भी वहीं हैं.’ सूत्रों ने कहा कि सीएम उद्धव ठाकरे ने उन सभी निर्वाचन क्षेत्रों के नेताओं से मुलाकात की है, जहां के विधायक एकनाथ शिंदे कैम्प में शामिल होने के लिए गुवाहाटी रवाना हुए हैं.इस मुद्दे पर विपक्षी दल का क्या है कहनाहालांकि, बीएमसी में विपक्ष का रुख कुछ और है। भाजपा के वरिष्ठ नेताओं में से एक, जिन्होंने निगम के कामकाज को करीब से देखा है, कहते हैं कि भ्रष्टाचार, गैर-प्रदर्शन और पर्याप्त सेवाएं नहीं देने से ठाकरे की सेना का आगामी बीएमसी चुनाव में पतन होगा. भाजपा के एक अन्य वरिष्ठ नेता ने कहा, ‘यह (शिवसेना की बीएमसी चुनावों में हार) तब भी होता, जब पार्टी के भीतर विभाजन नहीं होता. शिवसेना नेतृत्व के प्रदर्शन के कारण, उसके कैडर और नेता अंततः पार्टी छोड़ देंगे, अगर उन्हें बेहतर विकल्प मिलता है.’सबको इन सवालों के जवाब की है तलाशऐसे कई जवाब हैं जिनकी तलाश जनप्रतिनिधि भी कर रहे हैं. क्या होगा अगर शिंदे खेमे को चुनाव चिन्ह मिल जाए? बालासाहेब ठाकरे की असली शिवसेना कौन होगी? यदि शिवसेना का सिंबल नहीं मिलता, तो क्या शिंदे नई पार्टी बनाएंगे या भाजपा में विलय करेंगे? यदि हां, तो उनका क्या होगा जो शिंदे का पक्ष लेते हैं, लेकिन शिवसैनिक बने रहना चाहते हैं? सूत्रों का कहना है कि ​शिवसेना के बीएमसी पार्षदों की उद्धव ठाकरे के साथ होने वाली बैठक में अधिकांश शंकाओं का समाधान हो जाएगा.ब्रेकिंग न्यूज़ हिंदी में सबसे पहले पढ़ें News18 हिंदी | आज की ताजा खबर, लाइव न्यूज अपडेट, पढ़ें सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट News18 हिंदी |Tags: BMC Elections 2022, CM Uddhav Thackeray, Shivsena

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