Uddhav Thackeray FB Live: जब शिंदे थे शिवसेना का सीएम चेहरा तो आप क्यों बने थे मुख्यमंत्री, उद्धव ठाकरे ने बताया सच

Jagran | 5 days ago | 22-06-2022 | 09:57 am

Uddhav Thackeray FB Live: जब शिंदे थे शिवसेना का सीएम चेहरा तो आप क्यों बने थे मुख्यमंत्री, उद्धव ठाकरे ने बताया सच

मुंबई, राज्य ब्यूरो! पार्टी में भारी बगावत झेल रहे शिवसेना अध्यक्ष एवं महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे Uddhav Thackeray ने आज फेसबुक लाइव पर शिवसैनिकों के सामने काफी भावनात्मक अपील कीं। इस दौरान उन्होंने यह स्पष्टीकरण भी दिया कि मुख्यमंत्री पद की दौड़ में जब एकनाथ शिंदे को आगे माना जा रहा था, तो वह मुख्यमंत्री खुद क्यों बने? दरअसल, ढाई साल पहले राज्य में महाविकास आघाड़ी सरकार बनने की प्रक्रिया शुरू होने के बाद माना जा रहा था कि उद्धव ठाकरे Uddhav Thackeray अपने पिता स्वर्गीय बालासाहब ठाकरे की परंपरा का पालन करते हुए किसी अन्य शिवसेना नेता को ही मुख्यमंत्री बनाएंगे।Maharashtra Political Crisis: मातोश्री के बाहर उमड़े उद्धव ठाकरे के समर्थकों के हुजूम ने की नारेबाजी, देखें वीडियो यह भी पढ़ें चूंकि पिछली फडणवीस सरकार में शिवसेना के शामिल होने के पहले उद्धव ने एकनाथ शिंदे को नेता विरोधी दल की जिम्मेदारी सौंपी थी, और सरकार में शामिल होने के बाद उन्हें सार्वजनिक निर्माण विभाग जैसा महत्त्वपूर्ण विभाग भी सौंपा था इसलिए मुख्यमंत्री पद की दौड़ में शिंदे को आगे माना जा रहा था, लेकिन बाद में मुख्यमंत्री खुद उद्धव ही बने। इसका स्पष्टीकरण देते हुए उद्धव ने कहा कि पिछला विधानसभा चुनाव मैंने कांग्रेस-राकांपा के विरुद्ध लड़ा था। लेकिन उन्हीं के साथ हम सरकार में गए। शरद पवार ने मुझसे आग्रह किया था कि मेरी पार्टी और कांग्रेस में कई वरिष्ठ नेता हैं। उन्हें आपका नेतृत्व ही संभाल सकता है इसलिए मैंने मुख्यमंत्री बनना स्वीकार किया।Maharashtra Political Crisis: एकनाथ शिंदे क्यों चाहते हैं एमवीए गठबंधन टूटे? राज्यपाल को भेजे पत्र से हुआ खुलासा यह भी पढ़ें जिसे मेरा इस्तीफा चाहिए, खुद सामने आकर मांगेमुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे Uddhav Thackeray ने फेसबुक लाइव पर ये कहा है कि वह न सिर्फ मुख्यमंत्री पद, बल्कि शिवसेना प्रमुख का पद भी छोड़ने को तैयार हैं, लेकिन हमारा कोई शिवसैनिक खुद मेरे सामने मांगे आकर तो। पद लेने के पीछे मेरा कोई स्वार्थ नहीं है। राजनीति कोई भी मोड़ ले सकती है। मुझे आश्चर्य है कि कांग्रेस और राकांपा में से कोई कहता कि मुझे मुख्यमंत्री पद पर आपको नहीं चाहिए, तो मैं समझ सकता था। आज कमलनाथ और शरद पवार ने मुझे फोन किया और कहा कि हम आपके साथ हैं। मेरे ही लोग मुझे मुख्यमंत्री पद पर नहीं चाहते, तो मैं क्या कर सकता हूं।कोई शिवसैनिक मुख्यमंत्री बने तो मुझे खुशी होगीउद्धव ठाकरे Uddhav Thackeray ने बगावत का बिगुल बजा रहे एकनाथ शिंदे की नाम लिए बिना उनकी ओर इशारा करते हुए कहा कि यही बात आप मेरे सामने आकर कहते तो क्या हर्ज था। इसके लिए सूरत जाने की क्या जरूरत थी ? यदि आप चाहते हैं कि मैं मुख्यमंत्री न रहूं तो ठीक है। इनमें से एक भी विधायक मेरे सामने आकर कहे तो मैं आज ही इस्तीफा देने के लिए तैयार हूं। मुझे जबरन कुर्सी पर बैठने का कोई मोह नहीं है। लेकिन आपको सामने आकर कहना होगा। मेरे मुख्यमंत्री पद से हटने के बाद यदि कोई शिवसैनिक मुख्यमंत्री बनता है तो मुझे खुशी होगी।Maharashtra Political Crisis: क्या है दल बदल विरोधी कानून? क्या बागी शिवसैनिकों की विधायकी खतरे में यह भी पढ़ें हिंदुत्व के मुद्दे पर उठे सवालों का बेबाकी से जवाबबागी शिवसेना नेता एकनाथ शिंदे द्वारा वर्तमान शिवसेना के हिंदुत्व के एजेंडे से हटने का आरोप लगाया गया है। बुधवार को सांसद भावना गवली ने भी इसी ओर इशारा करते हुए एक पत्र उद्धव ठाकरे Uddhav Thackeray को लिखा है। उद्धव ने अपने संबोधन में हिंदुत्व के मुद्दे पर स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि ये सवाल उठाए जा रहे हैं कि ये बालासाहब ठाकरे वाली शिवसेना है या नहीं ? ये हिंदुत्व पर चलनेवाली शिवसेना है या नहीं ? ये सवाल उठाने वाले लोगों को समझ लेना चाहिए कि शिवसेना और हिंदुत्व एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। इन्हें अलग करके नहीं देखा जा सकता। हिंदुत्व के मुद्दे पर विधानसभा में बात करनेवाला मैं अकेला मुख्यमंत्री था। हम हिंदुत्व के मुद्दे को लेकर अयोध्या गए। कुछ दिन पहले आदित्य ठाकरे (उद्धव के पुत्र) भी कई विधायकों, सांसदों एवं शिवसैनिकों के साथ अयोध्या जाकर आए। बालासाहब के विचारों को हम ही आगे लेकर जा रहे हैं।Maharashtra Political Crisis: शिवसेना में पहले भी 4 बार हुई है बगावत, एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में इस बार की अलग कैसे? यह भी पढ़ें विधायकों से न मिल पाने के आरोपों को स्वीकाराउद्धव पर यह आरोप भी लग रहे हैं कि वह अपने ही विधायकों से मिलते नहीं थे। विधायकों से उनका संपर्क नहीं हो पाता था। इस आरोप को स्वीकार करते हुए उद्धव ने कहा कि ये सही है कि हम लोगों से ज्यादा मिलजुल नहीं पा रहे थे। सरकार बनने के बाद पहले दो साल कोविड के कारण ऐसा हुआ, उसके बाद मेरा आपरेशन होने के कारण लोगों से मिलना संभव नहीं हो सका। लेकिन आपरेशन के बाद हमने अस्पताल के कमरे में ही कैबिनेट की बैठक भी की थी।

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